| डिंपल कपाडिया - Dimple Kapadia कैसी हैं यह रुत के जिस में फूल बन के दिल खिले शंकर-एहसान-लॉय,दिल चाहता है
किसी नजर को तेरा, इंतजार आज भी है आशा - भूपेन्द्र, बप्पी लाहिरी,ऐतबार (1986)
यारा सिली सिली, बिरहा के रात का जलना लता मंगेशकर, गुलजार, पं. हृदयनाथ मंगेशकर,लेकिन (1990)
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