| झरीना वहाब - Zareena Wahab दो दीवाने शहर में, रात में या दोपहर में रुना लैला - भूपेंद्र, गुलजार, जयदेव,घरोंदा (1977)
तू जो मेरे सूर में, सूर मिला ले, संग गा ले हेमलता - येशुदास, रविन्द्र जैन, रविन्द्र जैन,चितचोर (1976)
तुम्हे हो ना हो, मुझ को तो इतना यकीन है रुना लैला, गुलजार, जयदेव,घरोंदा (1977)
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