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बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं
आदमी हूँ, आदमी से प्यार करता हूँ
एक खिलौना बन गया दुनियाँ के मेले में
कोई खेले भीड में कोई अकेले में
मस्कुराकर भेद हर स्विकार करता हूँ
हूँ बहुत नादान करता हूँ ये नादानी
बेचकर खुशियाँ खरीदू आँख का पानी
हाथ खाली हैं मगर व्यापार करता हूँ
मैं बसाना चाहता हूँ स्वर्ग धरतीपर
आदमी जिसमे रहे बस आदमी बनकर
उस नगर की हर गली तैय्यार करता हूँ | |