सखी रे मेरा मन उलझे, तन डोले अब चैन पडे तब ही, जब उन से मिलन होले लाख जतन करु ध्यान बटेना, ये रसवंती रैन कटेना पवन अगन सी घोले, अब चैन पडे ... सांस भी लूं तो आंचसी आए, चंचल काया पिघली जाए अधरों में तृष्णा बोले, अब चैन पडे ...