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तू मेरे सामने हैं, तेरी जुल्फे हैं खुली
तेरा आंचल हैं ढला, मैं भला होश में कैसे रहूँ
तेरी आँखें तो छलकते हुए पैमाने हैं
और तेरे होठ लरजते हुए मयखाने हैं
मेरे अरमान इसी बात पे दीवाने हैं
तू जो हसती हैं तो बिजली सी चमक जाती हैं
तेरे सांसों सी गुलाबों की महक आती हैं
तू जो चलती हैं तो कुदरत भी महक जाती हैं | |