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ऐसा कभी हुआ नहीं, जो भी हुआ खूब हुआ
देखते ही तुझे होश गुम हुए
होश आया तो, दिल मेरा दिल ना रहा
रेशमी जुल्फें हैं सावन की घटाओं जैसी
पलकें हैं तेरी, घने पेंड की छांव जैसी
भोलापन और हसीं , आफरीन, आफरीन
झील सी आँखों में, मस्ती के जाम लहराए
जब होंठ खुले तेरे सरगम बजे महके फिजाए
हर अदा दिलनशीन, आफरीन, आफरीन
पतली सी गर्दन में एक बल हैं सुराई जैसा
अंदाज मटकने का देखा ना किसी में ऐसा
गुलबदन नाजनीन, आफरीन, आफरीन
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