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हम ही से मोहोब्बत, हम ही से लडाई
अरे मार डाला, दुहाई, दुहाई
अभी नासमझ हो, उठाओ ना खंजर
कही मूड ना जाए, तुम्हारी कलाई
सितम आज मुझपर, जो तुम ढ़ा रही हो
बडी खूबसूरत, नजर आ रही हो
ये जी चाहता हैं के खुद जान दे दूँ
मोहोब्बत में आए ना तुमपर बुराई
हमे हुस्न की हर अदा हैं गवांरा
हसीनों का गुस्सा भी लगता हैं प्यारा
उधर तुमने तीर-ए-नजर दिल पे मारा
इधर हमने भी जान कर चोट खाई
करो खून तुम यूँ ना मेरे जिगर का
बस एम वार काफी हैं, तिरछी नजर का
यही प्यार को आजमाने के दिन हैं
किए जाओ हम से यूँ ही बेवफाई
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