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ताल पे जब ये, जिंदगानी चली
हम हैं दीवाने, ये कहानी चली
तेरी नजर की धूप हैं, जिसने मुझ को रुप दिया हैं
निखर गई हूँ, सवर गई हूँ ,जब से प्यार किया हैं
सच तो ये हैं सनम, हैं ये तेरे करम
होश सारा गवाँ के दीवानी चली
सच कहता हूं मैने जब से थामा हैं ये आंचल
मेरी दुनियाँ में हरपल हैं, जैसे कोई हलचल
सपने सजने लगे, साज बजने लगे
बदला मौसम हवा जो सुहानी चली
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