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चाँद ने कुछ कहा, रात ने कुछ सुना
तू भी सुन बेखबर, प्यार कर, प्यार कर
आई हैं चाँदनी, मुझसे कहने यही
मेरी गली, मेरे घर, प्यार कर, प्यार कर
क्या कहू क्या पता बात क्या हो गई
दिल्लगी ये मेरे, साथ क्या हो गई
एक इशारा हैं ये, दिल पूकारा हैं ये
इस से चूरा ना नजर, प्यार कर, प्यार कर
हैं कौन क्या खबर, कोई तो हैं मगर
सपनों में हैं कही, आता नही नजर
मैं यहाँ, वो वहाँ, आ रही फिर यहाँ
आवाज किसकी मगर, प्यार कर, प्यार कर
जिस पे हम मर मिटे, उसको पता भी नही
क्या गिला हम करे, वो बेवफा भी नही
हमने जो सुन लिया, उसने कहा भी नही
ऐ दिल जरा सोचकर, प्यार कर, प्यार कर | |