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तेरे लिए हम हैं जिए, होठों को सिए
दिल में मगर जलते रहे, चाहत के दिये
तेरे लिए हम हैं जिए, हर आँसू पिए
दिल में मगर जलते रहे , चाहत के दिये
जिंदगी ले के आई हैं, बीतें दिनों की किताब
घेरे हैं अब हमें यादें बेहिसाब
बिन पूछे मिले मुझे कितने सारे जवाब
चाहा था क्या, पाया हैं क्या, हमने देखिए
क्या कहूँ दुनियाँ ने किया मुझ से कैसा बैर
हुक्म था मैं जीऊँ लेकिन तेरे बगैर
नादां हैं वो कहते हैं जो, मेरे लिए तुम हो गैर
कितने सितम हम पे सनम, लोगों ने किए
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