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सुन जरा, सोनिए सुन जरा
आज खामोशियों से आ रही हैं सदा
धडकनें है दीवानी, दिल भी कुछ कह रहा हैं
बीतें लमहों के साये तो बस यही थम गए हैं
याद मुझे आए तेरी बातें
पलकोंकी सुर्ख चादर पे अश्क भी जम गए हैं
तेरी आखों से ना हटती आखें
बेबसी का हैं आलम क्या करू मैं बता
चूम के अपने होठों से तेरे गम को चुरा लू
ला के तुझे दे दूँ खुशियाँ सारी
अपनी हर बेकरारी को सीने में ही छूपा लू
मेरी चाहते जाए तुझ पे वारी
सहमें सहमें लबों में घूल गई हैं दूवां
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