|
यूँ ही चला चल राही, यूँ ही चला चल राही, कितनी हसीन हैं ये दुनियाँ
फूल सारे झमेले, देख फुलों के मेले, बडी रंगीन हैं ये दुनियाँ
ये रास्ता हैं कह रहा अब मुझ से, मिलने को हैं कोई कही अब तुझ से
दिल को हैं क्यों ये बेताबी, किससे मुलाकात होनी हैं
जिसका कब से अरमां था, शायद वो ही बात होनी हैं
यूँ ही चला चल राही, यूँ ही चला चल राही, जीवन गाडी हैं, समय पैय्या
आंसू की नदीया भी हैं, खुशियों की बगिया भी हैं, रस्ता सब तेरे तके भैय्या
यूँ ही चला चल राही, यूँ ही चला चल राही, कितनी हसीन हैं ये दुनिया
फूल सारे झमेले, देख फुलों के मेले, बडी रंगीन हैं ये दुनिया
देखू जिधर भी इन राहों में, रंग पिघलते हैं निगाहों में
ठंडी हवा हैं, ठंडी छाँव हैं, दूर वो जाने किसका गाँव हैं
बादल ये कैसा छाया, दिल ये कहा ले आया
सपना ये क्या दिखलाया हैं मुझको
हर सपना सच लगे, जो प्रेम अगन जले
जो राह तू चले, अपने मन की
हर पल की सींप से मोती ही तू चुने
जो तू सदा सुने, अपने मन की
यूँ ही चला चल राही, यूँ ही चला चल राही, कितनी हसीन हैं ये दुनिया
फूल सारे झमेले, देख फुलों के मेले, बडी रंगीन हैं ये दुनिया
मन अपने को कुछ ऐसे हलका पाए, जैसे कंधो पे रखा बोझ हट जाए
जैसे भोला सा बचपन फिर से आए, जैसे बरसों में कोई गंगा नहाए
खुल सा गया हैं ये मन, खुल सा गया हर बंधन
जीवन अब लगता हैं पावन मुझ को, जीवन में प्रीत हैं, होठों पे गीत हैं
बस यही जीत हैं, सुन ले राही, तू जिस दिशा भी जा, तू प्यार ही लूटा
तू दीप ही जला, सुन ले राही
यूँ ही चला चल राही, यूँ ही चला चल राही, कौन ये मुझ को पुकारे
नदिया, पहाड, झील और झरने, जंगल और वादी, इन में हैं किसके इशारे
यूँ ही चला चल राही, यूँ ही चला चल राही .......
| |