|
सूरज हुआ मद्धम,चांद जलने लगा
आसमां ये हाए, क्यों पिघलने लगा
मैं ठहरा रहा, जमीं चलने लगी
धडका ये दिल, सांस थमने लगी
क्या ये मेरा पहला पहला प्यार हैं
सजना ......
सूरज हुआ मद्धम,चांद जलने लगा
आसमां ये हाए, क्यों पिघलने लगा
मैं ठहरी रही, जमीं चलने लगी
धडका ये दिल, सांस थमने लगी
क्या ये मेरा पहला पहला प्यार हैं
सजना ......
हैं खूबसुरत ये पल, सबकुछ रहा हैं बदल
सपनें हकिकत में जो ढ़ल रहे हैं
क्या सदियों से पूराना, हैं रिश्ता ये हमारा
के जिस तरह तुमसे हम मिल रहे हैं
यूँ ही रहे हरदम, प्यार का मौसम
यूँ ही मिलो हमसे, तुम जनम जनम
मैं ठहरा रहा, जमीं चलने लगी
तेरे ही रंग से यूँ मैं तो रंगी हूँ सनम
पा के तुझे खुद से भी खो रही हूँ सनम
ओ माहीया, वे तेरे ईश्क में
हा डूब के पार मैं हो रही हूँ सनम
सागर हुआ प्यासा, रात जगने लगी
शोलोंके दिलमें भी आग जलने लगी
मैं ठहरी रही, जमीं चलने लगी
जलता रहे सूरज चाँद रहे मध्यम
ये ख्वाब हैं मुश्किल ना मिल सकेंगे हम
| |