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तुम गए, सब गया
कोई अपनी ही मिट्टी तले दब गया
कोई आया था, कुछ देर पहले यहा
लेके मिट्टी से लेपा हुआ आसमां
कब्र पर डाल कर वो गया, कब गया
हाथों पैरों में तनहाईयाँ चलती हैं
मेरी आँखोंमें परछाईयाँ चलती हैं
एक सैलाब था, सारा घर बह गया
फिर भी जीने का थोडा सा डर रह गया
जख्म जीने के क्यों दे गया, जब गया
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