समझौता गमोंसे कर लो ,जिंदगी में गम भी मिलते हैं
पतझड आते ही रहते हैं ,के मधुबन फिर भी खिलते हैं
रेत के नीचे जल की धारा , हर सागर का यहा किनारा
रातों के आंचल में छूपा हैं सूरज प्यारा
दे दो मुझको जिम्मेदारी, मैं बन जाऊ नजर तुम्हारी
तुम मेरी आखोंसे, देखो दुनिया सारी