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जादू हैं, नशा हैं, मदहोशियाँ
तुझ को भूला के अब जाऊँ कहा
देखती हैं जिस तरह से तेरी नजरें मुझे
मैं खुद को छुपाऊँ कहा
ये पल हैं अपना, तो इस पल को जी ले
शोलों की तरह जरा जल के जी ले
पल झपकते खो ना जाना
छू के कर लू यकीं न जाने पल ये पाए कहा
जादू हैं, नशा हैं.....
बाहों में तेरी यूँ खो गए हैं
अरमां दबे से जगने लगे हैं
जो मिले हो आज हम को
दूर जाना नही, मिटा दो सारी ये दूरीयाँ
जादू हैं, नशा हैं.....
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