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आने से उस के आए बहार
जाने से उस के जाए बहार
बडी मस्तानी हैं, मेरी मेहबूबा
मेरी जिंदगानी हैं, मेरी मेहबूबा
गुनगुनाए ऐसे जैसे बजते हो घुंगरु कही पे
आके परबतों से जैसे गिरता हो झरना जमीं पे
झरनों की मौज हैं वो, मौजों की रवानी हैं, मेरी मेहबूबा
मेरी जिंदगानी हैं, मेरी मेहबूबा
बन सवर के निकले, आए सावन का जब जब महीना
हर कोई ये समझे, होगी वो कोई चंचल हसीना
पूछो तो कौन है वो, रुत ये सुहानी हैं, मेरी मेहबूबा
मेरी जिंदगानी हैं, मेरी मेहबूबा
इस घटा को मैं तो, उसकी आँखों का काजल कहूँगा
इस हवा को मैं तो, उसका लहराता आंचल कहूँगा
कलियों का बचपन हैं, फूलों की जवानी हैं, मेरी मेहबूबा
मेरी जिंदगानी हैं, मेरी मेहबूबा
बीत जाते हैं दिन, कट जाती हैं आँखों में रातें
हम ना जाने क्या क्या, करते रहते हैं आपस में बातें
मैं थोडा दीवाना, थोडीसी दीवानी हैं, मेरी मेहबूबा
मेरी जिंदगानी हैं, मेरी मेहबूबा
सामने मैं सब के नाम उसका नही ले सकूंगा
वो शरम के मारे रुठ जाए तो मैं क्या करुंगा
हुरोंकी मलिका हैं, परीयों की रानी हैं, मेरी मेहबूबा
मेरी जिंदगानी हैं, मेरी मेहबूबा
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