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आप मुझे अच्छे लगने लगे
सपने सच्चे लगने लगे
नैन सारी रैन जगने लगे
बातें यही होने लगी गांव में
छूपती फिरु मैं, धूप में छांव में
जंजीरे फौलाद की हैं पाँव में
मगर छनछनन घुंगरू बजने लगे
अखियों को भेद खोलना आ गया
मेरे मन को भी डोलना आ गया
खामोशी को बोलना आ गया
देखो, गीत मेरे मुख पे सजने लगे
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