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ऐसा लगता हैं, जो ना हुआ होने को हैं
ऐसा लगता हैं, अब दिल मेरा खोने को हैं
वर्ना दिल क्यो धडकता, सांसे क्यो रुकती, नींदे मेरी क्यो उड जाती
कोई चेहरा निगाहों पे छाने लगा
कोई अब रोज ख्वाबों में आने लगा
आई रुत जो नई, जागे अरमां कई
मौसम कोई गझल जैसे गाने लगा
ऐसा लगता हैं, जैसे नशा होने को हैं
ऐसा लगता हैं, होश मेरा खोने को हैं
वर्ना दिल क्यो धडकता .....
महकी, महकी फिजा ने ली अंगडाईयाँ
नीली, नीली हैं बादल की परछाईयाँ
ठंडी, ठंडी हवा, लाई राग नया
गूँजी, गूँजी सी हैं जैसे शहनाईयाँ
ऐसा लगता हैं, कोई मेरा होने को हैं
ऐसा लगता हैं, हर फासला खोने को हैं
वर्ना दिल क्यो धडकता .....
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