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तोहे सावरीयाँ, नाही खबरीयाँ
तुमरे कारन अपने देस में बलम
हम हो गए परदेसी
ना जाने कौनसा अपना आंगना, कौनसी अटरीयाँ
अपने ही गांव के गलियों में भूले फिरते हैं हम डगरीयाँ
आओ, घर अपने हमे छोड जाओ, के हम हो गए परदेसी
ये दुनिया, लाज, सपने, दिल, चैन, निंदीयाँ, प्यार, जवानी
अपना क्या रह गया, तुमरे नाम कर दी जब जिंदगानी
हाए, सब अपने हमे बहोत याद आए, के हम हो गए परदेसी | |