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ऐ उडी उडी, ऐ ख्वाबों की पुडी, ऐ अंग रंग खिली, ऐ सारी रात हो गई
हल्की, ऐ हल्की, कल रात जो शबनम गिरी
अरे अंखीयाँ वखियाँ भर गई, कल तो हाथ पे डब डब गिरी
पहली पहली बारीश की छींटे, पहली बारीश भीगे
उल्झी हुयी थी, खुलती गई थी लट, वो रात भर बरसी
कभी मनाए खूब सताये, थी सब यार की मर्जी
छेड दूँ मैं कभी प्यार से, तो तंग होती है
छोड दूँ रूठ के, तो भी तो जंग होती है
छेड दूँ मैं कभी प्यार से, तो तंग होती है
खामखाँ चूम लूँ तो भी तो, जंग होती है
ज़िंदगी आँखों की आयत है, ज़िंदगी आँखों में रखी हैं, तेरी अमानत है ये जिंदगी
लड लड के जीने को ये लम्हें तोडे हैं, मर मर के सीने में ये शीशे जोडे हैं
तुम कह दो सब ला दे, बस इतना सोचो तो, अम्बर पे पहले ही सितारे थोडे हैं
ज़िंदगी आँखों की आयत है, ज़िंदगी पलकों में झपकी हैं, मीठी शिकायत है ये जिंदगी | |