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आग कभी कभी रोशनी , कही कही शोर, रौनके
कहिं आग आग, कहिं धुँवा धुँवा
कभी आस पास, कभी यहां वहां
कभी शोर हो तुम, कभी मौन हो तुम, कौन हो तुम ?
दर्द से गहरे,सोच से उंचे
प्यार से उझले, नक्श तुम्हारे ज़हेन में मेरे, धुन्दले धुन्दले
खुद से अन्जान हूँ मैं, खुद से बेगना
क्या देखती है तुम्हारी नज़र मुझको बताना
दो आंखे है, आंखों में क्या है
एक चेहरा हैं, किसका चेहरा है
पुछो अपने दिल से पुछो , पुछो हवाओं से
खोया खोया था दूँनिया की राहों में
तुझ से मिल के हूँ मैं खोया, तेरी निगाहों में
तुम्हें नाम दिया है मैने एक , तुम्हें शक्ल दे रहा हूँ मैं अब
मासूम नज़र, भोला चेहरा, हसते हुए लब, एक शब्द हो तुम
कोइ सच हो तुम, या उल्झा हुआ खयाल हो
फिलहाल तुम एक सवाल हो
क्या हुआ, हुआ क्या ऐसे कैसी ये हलचल हैं
बदला हुआ है, तेरे आने से जहां
कुछ ना कहो तुम, क्यों ना कहूँ मैं
खो ना जाऊँ तेरी बातों की बाहों मैं
जिस की तस्वीर निगाहो में, तस्वीर में देखे रंग कई
रंगों में मौसम बहार का, तेरी जीत का,मेरी हार का
इन्कार का,इंतज़ार का, इकरार का,तकरार का
भीगा सा एक रंग प्यार का
क्या हो तुम, ये तुम बताओ तुम ने क्या जाना हैं
जाना के तुम हो्, चलो जाना तो सही
अब तो बताओ, यूँ ना सताओ
हो ना जाए ना सोचा था खयालों में
तेरी सादगी अनमोल हैं, किरदार बेमिसाल है
तू जो भी है लाजवाब है, तू खयाल है या एक सवाल है
तेरे सामने जो भी आएगा, उसे तुझसे प्यार हो ही जाएगा | |