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हलका हलका सा ये नशा, बहका बहका सा ये समा
आ जा ना जानेजां, आ जा ना ये समा, जाए ना
क्यों भला सपनों के पिछे, दिल मेरा अपनों के पिछे खोता हैं
ख्वाहिशे आवारा बन के तूट जाए तारा बन के, होता हैं
होता हैं कल मगर, बीता जो पल अगर, आए ना आए ना
जल उठे शोला तो इस में जो चले हवा, तो किस ने रोका हैं
हो रहा है दिल बेकाबु ये नही आंखों का जादू, धोका हैं
राहें धूँवा धूँवा, मंझिल जाने कहा, खो रहा कारवाँ | |