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तेरी महफिल में किस्मत आजमांकर हम भी देखेंगे
घडी भर को तेरे नजदिक आ कर हम भी देखेंगे
तेरी महफिल में किस्मत आजमांकर हम भी देखेंगे
तेरे कदमों पे सर अपना झूकाकर हम भी देखेंगे
बहारें आज पैगाम-ए-मोहोब्बत लेके आई हैं
बडी मुद्दत में उम्मीदों की कलियाँ मुस्कुराई हैं
गम-ए-दिल से जरा दामन बचाकर हम भी देखेंगे
अगर दिल गम से खाली हो, तो जीने का मजा क्या हैं
ना हो खून-ए-जिगर तो अश्क पीने का मजा क्या हैं
मोहोब्बत मे जरा आँसू बहाकर हम भी देखेंगे
मोहोब्बत करनेवालों का हैं बस इतना ही अफसाना
तडपना चूप के चूप के आह भरना घूट के मर जाना
किसी दिन ये तमाशा मुस्कुराकर हम भी देखेंगे
मोहोब्बत हमने माना, जिंदगी बरबाद करती हैं
ये क्या कम हैं के मर जाने पे दुनियाँ याद करती हैं
किसी के इश्क में दुनियाँ लूटाकर हम भी देखेंगे | |