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रात का नशा अभी आँख से गया नहीं
तेरा नशिला बदन, बाहों ने छोडा नहीं
आँखें तो खोली मगर, सपना वो तोडा नहीं
साँसों पे रखा हुआ तेरे होठों का सपना अभी हैं वही
तेरे बीना भी कभी तुझ से मचल लेती हूँ
करवटें बदलती हूँ तो सपना बदल लेती हूँ
तेरा खयाल आए तो, बल खाँके पल जाता हैं
पानी की चादर तले तन मेरा जल जाता हैं
साँसों पे रखा हुआ तेरे होठों का सपना अभी हैं वही
तेरे गले मिलने के मौसम बडे होते हैं
जन्मों का वादा कोई, ये गम बडे छोटे हैं
लंबी सी एक रात हो, लंबा सा एक दिन मिले
बस इतना सा जीना हो मिलन की घडी जब मिले
साँसों पे रखा हुआ तेरे होठों का सपना अभी हैं वही | |