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इश्क में दिल को पागल बना बैठे, उन से नजरे क्या मिली
होशोंहवास हम तो गवां बैठे, उन से नजरे क्या मिली
उन की बातें उन का चर्चा, शाम सवेरे करते हैं
एहसासों की ओढ़ के चादर, पल पल जीते मरते हैं
हम तो खुद को धीरे भुला बैठे, उन से नजरे क्या मिली
साया बन के साथ चले जो, उन की ही परछाई हैं
पागलपन हैं खामोशी हैं, चारों तरफ तनहाई हैं
हम पलकों में सपने सजा बैठे, उन से नजरे क्या मिली | |