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वो चांद जैसी लडकी इस दिल पे छा रही हैं
आँखों के रास्ते से इस दिल में आ रही हैं
अल्लड सी भोलीभाली मासूम यह शरारत
बदली नहीं हैं अबतक बचपन की उस की आदत
तडपा रही हैं यादें, हो जाउँ ना मैं पागल
आ जाये सामने वो, यह जान जा रही हैं
मेरा चांद बादलों में क्यों जा के खो गया हैं
अब दूर इस कदर वो क्यों मुझ से हो गया हैं
क्यों जी रहा हूँ तनहा, ये याद भी नहीं हैं
बस इतना याद हैं के वो याद आ रही हैं | |