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प्यार हम को भी हैं, प्यार तुम को भी हैं
तो ये क्या सिलसिले हो गये
बेवफा हम नहीं, बेवफा तुम नहीं
तो क्यों इतने गिले हो गये
चलते चलते, कैसे ये फासले हो गये
क्या पता कहा हम चले
दुनियाँ जो पूँछे तो क्या हम कहें
कोई यह हम को समझायें
ठेस लगी तो पल में टूट गये
शीशे के थे क्या सब वादे
जाता हैं कोई क्यों सपनों को ठुकराके
पायेगा यह दिल क्या किसी को बता के
चलते चलते, राख हम बीन जले हो गये
बुझ गये दिये प्यार के
डूब गया हैं जैसे दर्द में दिल
आँसू भरी हैं अब आँखें
तनहाईयों की जो रुत आ गई
उजडी हुई हैं सब राहें
सोचा था पायेंगे दोनो एक मंझिल को
राहें जो बदली तो तुम ही बतादो
चलते चलते, गुम कहा काफले हो गये
खो गये कहा रास्तें | |