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न रो ऐ दिल, कहीं रोने से तक़दीरें बदलती हैं
कहीं आँसू बहाने से तमन्नाएं निकलती हैं
नतीजा मिल गया हमको किसी से दिल लगाने का
सितम देखा नसीबों का, करम देखा ज़माने का
मोहब्बत आह भरती है, वफ़ाएं हाथ मलती हैं
लिये जाते थे ऐ दिल, हम तेरी नैय्या किनारे पर
मोहब्बत के भरोसे पर, उम्मीदों के सहारे पर
खबर क्या थी के ज़ालिम आँधियाँ भी साथ चलती है | |