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पल पल पल हर पल कैसा कटेगा हर पल
दिल में मची हैं हलचल
कैसा हटेगा पल, हर पल हर पल
ओ हमसफर लगता हैं डर
रात कटे ना कभी हो सेहर
इस पल में सिमटे उमर
रात कटे ना कभी हो सेहर
तू जो हैं साथ मेरे तो डगर
लगे के जैसे खुबसूरत घर
तू जो हैं साथ तो यह अंबर
लगे के जैसे साया हो सर पर
तेरे कांधे पर रखकर सर
यूँ ही कट जाये सारी उमर
कल क्या हो किस को खबर
लगता हैं डर लगता हैं डर
इस पल में सिमटे उमर
रात कटे ना कभी हो सेहर
दिल की इतनी सारी बातें
कैसे लिखोगे इस छोटे खत पर
दिल पर टूटा हैं यह कैसा कहर
तुमको पाकर खोने का हैं डर
प्यार का यह ढ़ाई आखर
कैसे लिखोगे इस छोटे खत पर
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