| मेहबूब - Mehboob
आँखों की गुस्ताखियाँ माफ हो कविता कृष्णमुर्ती - कुमार सानू, ईस्माइल दरबार, हम दिल दे चुके सनम (1999)
ऐ नाजनीन सुनो ना हमे तुम पे हक तो दो ना, चाहे तो जान लो ना अभिजीत, ए. आर. रहमान, दिल ही दिल में (2000)
कहना ही क्या, ये नैन एक अनजान से जब मिले चित्रा, ए. आर. रहमान, बॉम्बे (1995)
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