| कश्मिर की कली - Kashmir Ki Kali (1964)
बलमा खुली हवा में, महकी हुई फिजामें आशा भोसले, ओ. पी. नय्यर
दिवाना हुआ बादल, सावन की घटा छाई आशा - रफी, एस. एच. बिहारी, ओ. पी. नय्यर
है दुनियाँ उसीकी जमाना उसीका मोहम्मद रफी, एस. एच. बिहारी, ओ. पी. नय्यर
इशारों इशारों में दिल लेनेवाले आशा - रफी, एस. एच. बिहारी, ओ. पी. नय्यर
ये चाँद सा रोशन चेहरा, जुल्फों का रंग सुनहरा मोहम्मद रफी, एस. एच. बिहारी, ओ. पी. नय्यर
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