| अर्थ - Arth (1983)
झूकीं झूकीं सी नजर बेकरार है के नहीं जगजीत सिंग, कैफी आझमी, जगजीत सिंग
कोई ये कैसे बताए के वो तनहा क्यों है जगजीत सिंग, कैफी आझमी, जगजीत सिंग
तू नहीं तो जिंदगी में और क्या रह जाएगा चित्रा सिंग, इफ्तिखार इमाम सिद्दीकी, जगजीत सिंग
तुम इतना जो, मुस्कुरा रहे हो जगजीत सिंग, कैफी आझमी, जगजीत सिंग
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