| मुगल-ए-आझम - Mughal-E-Aazam (1960)
जब रात हैं ऐसी मतवाली, फिर सुबह का आलम क्या होगा नौशाद
मोहब्बत की झूठी कहानी पे रोए लता मंगेशकर, शकिल बदायुनी, नौशाद
प्यार किया तो डरना क्या लता मंगेशकर, शकिल बदायुनी, नौशाद
तेरी महफिल में किस्मत आजमांकर हम भी देखेंगे लता - शमशाद बेगम, नौशाद
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