| हम दिल दे चुके सनम - Hum Dil De Chuke Sanam (1999)
आँखों की गुस्ताखियाँ माफ हो कविता कृष्णमुर्ती - कुमार सानू, मेहबूब, ईस्माइल दरबार
चाँद छूपा बादल में, शरमा के मेरी जाना अलका याज्ञिक - उदित नारायण, ईस्माइल दरबार
हम दिल दे चुके सनम ईस्माइल दरबार
झोंका हवा का आज भी, जुल्फें उडाता होगा ना ईस्माइल दरबार
तडप तडप के इस दिल से आह निकलती रही ईस्माइल दरबार
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