| रात और दिन - Raat Aur Din (1967)
दिल की गिरह खोल दो चूप ना बैठो लता - मन्ना डे, शैलेन्द्र, शंकर जयकिशन
जीना हम को रास ना आया लता मंगेशकर, शैलेन्द्र, शंकर जयकिशन
ना छेडो कल के अफसाने, करे इस रात की बाते लता मंगेशकर, शैलेन्द्र, शंकर जयकिशन
रात और दिन दिया जले मेरे मन में फिर भी अंधियारा हैं लता मंगेशकर, हसरत जयपुरी, शंकर जयकिशन
रात और दिन दिया जले मुकेश, हसरत जयपुरी, शंकर जयकिशन
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