| प्रहार - Prahaar (1991)
धडकन, जरा रुक गयी है, कही जिंदगी बह रही हैं सुरेश वाडकर, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
हमारी ही मुठ्ठी में आकाश सारा, जब भी खुलेगी चमकेगा तारा कविता कृष्णमुर्ती, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
हमारी ही मुठ्ठी में आकाश सारा, जब भी खुलेगी चमकेगा तारा मन्ना डे, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
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