| देवदास - Devdas (2002)
हमेशा तुम को चाहा, और चाहा कुछ भी नहीं कविता कृष्णमुर्ती - उदित नारायण, नुसरत बद्र, ईस्माइल दरबार
सिलसिला यह चाहत का, ना मैंने बुझने दिया श्रेया घोषल, नुसरत बद्र, ईस्माइल दरबार
वो चांद जैसी लडकी इस दिल पे छा रही हैं उदित नारायण, नुसरत बद्र, ईस्माइल दरबार
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