| मदन मोहन - Madan mohan
दो पल रुका, ख्वाबो का कारवां जावेद अख्तर, वीर झारा (2004)
एक हसीन शाम को दिल मेरा खो गया राजा मेहंदी अली खान, मोहम्मद रफी, दुल्हन एक रात की (1966)
हैं इसी में प्यार की आबरु राजा मेहंदी अली खान, लता मंगेशकर, अनपढ़ (1962)
है तेरे साथ मेरी वफा, मै नहीं तो क्या कैफी आझमी, लता मंगेशकर, हिंदुस्तान की कसम (1973)
हम से आया ना गया, तुम से बुलाया ना गया राजेन्द्र कृष्ण, तलत मेहमूद, देख कबिरा रोया (1957)
हर तरफ अब यही अफसाने है कैफी आझमी, मन्ना डे, हिंदुस्तान की कसम (1973)
हम है मता-ए-कूंचा, बाजार की तरह मजरुह सुलतानपुरी, लता मंगेशकर, दस्तक
जाना था हम से दूर, बहाने बना लिए राजेन्द्र कृष्ण, लता मंगेशकर, अदालत (1958)
जानम देख लो मिट गई दूरियाँ जावेद अख्तर, उदित नारायण, वीर झारा (2004)
जरा सी आहट होती है, तो दिल सोचता है कैफी आझमी, लता मंगेशकर, हकिकत (1964)
जिया ले गयो जी मोरा सावरीयाँ राजा मेहंदी अली खान, लता मंगेशकर, अनपढ़ (1962)
जो हमने दास्तां अपनी सुनायी, आप क्यों रोए राजा मेहंदी अली खान, लता मंगेशकर, वह कौन थी (1964)
कभी ना कभी, कहीं ना कहीं, कोईना कोई तो आएगा मोहम्मद रफी, शराबी (1964)
कौन आया मेरे मन के द्वारे पायल की झंकार लिए राजेन्द्र कृष्ण, मन्ना डे, देख कबिरा रोया (1957)
लग जा गले के फिर ये हसीं रात हो ना हो राजा मेहंदी अली खान, लता मंगेशकर, वह कौन थी (1964)
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