| मदन मोहन - Madan mohan
शौख नजर की बिजलियाँ, दिल पे मेरे गिराए जा राजा मेहंदी अली खान, आशा भोसले, वह कौन थी (1964)
सिमटी सी, शरमाई सी, किस दुनियाँ से तुम आयी हो कैफी आझमी, किशोर कुमार, परवाना
तेरे लिए हम हैं जिए, होठों को सिए जावेद अख्तर, वीर झारा (2004)
तेरी आंखों के सिवा दुनियाँ में रखा क्या है मजरुह सुलतानपुरी, लता मंगेशकर, चिराग (1969)
तू जहा जहा चलेगा, मेरा साया साथ होगा राजा मेहंदी अली खान, लता मंगेशकर, मेरा साया (1966)
तू मेरे सामने हैं, तेरी जुल्फें हैं खुली हसरत जयपुरी, मोहम्मद रफी, सुहागन
तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा, तेरे सामने मेरा हाल हैं मजरुह सुलतानपुरी, मोहम्मद रफी, आंखरी दांव (1958)
तुम जो मिल गए हो, तो ये लगता है कैफी आझमी, मोहम्मद रफी, हंसते जख्म (1973)
तुम्हारी जुल्फ के साये में शाम कर लूंगा कैफी आझमी, मोहम्मद रफी, नौनिहाल (1967)
उनको ये शिकायत हैं के हम कुछ नही कहते राजेन्द्र कृष्ण, लता मंगेशकर, अदालत (1958)
वो चूप रहे तो मेरे दिल के दाग जलते हैं राजेन्द्र कृष्ण, लता मंगेशकर, जहां आरा (1964)
वो जो मिलते थे कभी हमसे दीवानों की तरह मजरुह सुलतानपुरी, लता मंगेशकर, अकेली मत जैयो (1963)
वो भूली दास्तां, लो फिर याद आ गई राजेन्द्र कृष्ण, लता मंगेशकर, संजोग
यही हैं तमन्ना, तेरे दर के सामने, मेरी जान जाए राजा मेहंदी अली खान, मोहम्मद रफी, आपकी परछाईयाँ (1964)
ये दुनियाँ, ये महफिल, मेरे काम की नहीं कैफी आझमी, मोहम्मद रफी, हीर रांझा (1970)
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