| भूपेंद्र - Bhupendra
आज बिछडे है, कल का डर भी नहीं गुलजार, खय्याम, थोडीसी बेवफाई (1980)
बादलों से काट काट के, कागजों पे नाम जोडना गुलजार, विशाल, सत्या (1998)
दिल ढ़ूंढ़ता है, फिर वही फुरसत के रात दिन गुलजार, मदन मोहन, मौसम (1975)
एक अकेला इस शहर में, रात में और दोपहर में गुलजार, जयदेव, घरोंदा (1977)
करोगे याद तो, हर बात याद आएगी बशर नवाज, खय्याम, बाजार (1982)
कोई नहीं है कही, सपनों में क्यों खो गई? गुलजार, राहुलदेव बर्मन, किनारा (1976)
जिंदगी फुलों की नहीं, फुलों की तरह महकी रहे
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