| मोहम्मद रफी - Mohammad Rafi
अपनी आझादी को हम हरगीज मिटा सकते नहीं शकिल बदायुनी, नौशाद, लीडर (1964)
अपनी तो हर आह एक तूफान हैं शैलेन्द्र, सचिनदेव बर्मन, काला बाजार (1960)
ऐ गुलबदन, ऐ गुलबदन हसरत जयपुरी, शंकर जयकिशन, प्रोफेसर (1962)
बाबूल की दुवाए लेती जा, जा तुझ को सुखी संसार मिले साहिर लुधियानवी, रवी, नीलकमल (1968)
बहारों फूल बरसाओ, मेरा मेहबूब आया है हसरत जयपुरी, शंकर जयकिशन, सुरज (1966)
बंदापरवर, थाम लो जिगर, बन के प्यार फिर आया हूँ मजरुह सुलतानपुरी, ओ. पी. नय्यर, फिर वही दिल लाया हूँ (1963)
भरी दुनियाँ में आखिर दिल को समझाने कहा जाए शकिल बदायुनी, रवी, दो बदन (1966)
बिछडे सभी बारी बारी कैफी आझमी, सचिनदेव बर्मन, कागज के फूल (1959)
चाहूँगा मैं तुझे सांज सवेरे मजरुह सुलतानपुरी, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, दोस्ती (1964)
चल उड जा रे पंछी, के अब ये देस हुआ बेगाना राजेन्द्र कृष्ण, चित्रगुप्त, भाभी (1957)
चले जा, चले जा, चले जा, जहाप्यार मिले शंकर जयकिशन, जहां प्यार मिले (1969)
चले थे साथ मिल के, चलेंगे साथ मिलकर कल्याणजी आनंदजी, हसीना मान जायेगी
छलकाए जाम, आईए आप की आँखों के नाम मजरुह सुलतानपुरी, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, मेरे हमदम मेरे दोस्त (1968)
छलकें तेरी आँखों से शराब और ज्यादा हसरत जयपुरी, शंकर जयकिशन, आरजू (1965)
चौदहवी का चांद हो, या आफताब हो शकिल बदायुनी, रवी, चौदहवी का चांद (1960)
| |